देहरादून
12 साल बाद कुटी में सजा बेटियों का मेला: ऐतिहासिक कुंभ पूजा में दिखी संस्कृति की जीवंत झलक
चीन सीमा से सटे व्यास घाटी के अंतिम गांव में 7 दिन तक चला उत्सव, देश-विदेश से लौटीं 200 से अधिक बेटियां
चीन सीमा से सटे व्यास घाटी के अंतिम गांव कुटी में 12 वर्षों में एक बार होने वाली ऐतिहासिक कुंभ पूजा रीति-रिवाज और धार्मिक परंपराओं के बीच संपन्न हो गई। 15 से 21 अगस्त तक चले सात दिवसीय आयोजन में संस्कृति की अनूठी परंपराएं देखने को मिलीं।
आयोजन का सबसे भावुक क्षण तब रहा जब व्यास घाटी, दारमा, चौदास और पड़ोसी देश नेपाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों में ब्याही गई 200 से अधिक बेटियां वर्षों बाद अपने मायके पहुंचीं। इस दौरान एक हजार से अधिक ग्रामीणों ने पूजा में भाग लिया।
लमाओं ने की देश की खुशहाली की प्रार्थना
ग्राम प्रधान नगेंद्र सिंह कुटियाल ने बताया कि कुंभ पूजा में गांव के लमाओं (पुजारी) चेत सिंह कुटियाल, हरीश सिंह कुटियाल, गोपाल सिंह कुटियाल, बिरेंद्र सिंह कुटियाल, गोकरन सिंह कुटियाल, धनपाल कुटियाल और सुबम कुटियाल ने हया गुलच, हया मापंग और हया नमच्यल सहित अन्य देवी-देवताओं की रं विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देश, प्रदेश और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
पंचायत घर से ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य करते हुए देव प्रांगण तक पहुंचे। गांव की महिलाओं ने पुजारियों और मायके आई बेटियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। पूजा में शामिल होने पहुंची सभी बेटियों को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
कई साल बाद मायका लौटकर भावुक हुईं बेटियां
नेपाल के तिंकर गांव से दशरथी कुटियाल तिंकरी, तारा कुटियाल तिंकरी, चौदास घाटी से कल्पना कुटियाल यरसो, दारमा घाटी से एवरेस्ट विजेता सुमन कुटियाल दताल, देहरादून से सीमा कुटियाल दत्ता, हल्द्वानी से भवानी कुटियाल बृजवाल, किशोरी कुटियाल गर्ब्याल, एकता कुटियाल पतियाल और लखनऊ से रूपा कुटियाल गुंज्याल सहित कई बेटियों ने पूजा में भाग लिया।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
माउंट एवरेस्ट विजेता सुमन कुटियाल दताल अपनी 93 वर्षीय माता खिमे देवी और मौसी पद्मश्री, अर्जुन अवार्डी चंद प्रभा ऐतवाल (85) के साथ पूजा में शामिल हुईं। उन्होंने परिजनों के साथ वन विभाग से प्राप्त 1000 देवदार, बांस और बांज के पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान चंद प्रभा ऐतवाल ने आदि कैलाश और कुटी तक सड़क सुविधा पहुंचाने पर केंद्र सरकार और बीआरओ का आभार जताया।
