टिहरी
सत्यनिष्ठा से समृद्धि का संदेश लेकर विद्यार्थियों ने किया नुक्कड़ नाटक
राजकीय महाविद्यालय खाड़ी में सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
राजकीय महाविद्यालय खाड़ी, टिहरी गढ़वाल में निदेशालय सतर्कता अधिष्ठान, उत्तराखंड, देहरादून द्वारा निर्धारित ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ थीम के अंतर्गत सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा खाड़ी क्षेत्र में भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने आमजन को भ्रष्टाचार के विभिन्न स्वरूपों के प्रति जागरूक किया। प्रस्तुति में रिश्वत देना एवं लेना, निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए अनुचित साधनों का प्रयोग करना, नकल करके परीक्षा उत्तीर्ण करना तथा नियमों की जानकारी के अभाव में अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त होना जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया गया। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय एवं संवादों के माध्यम से यह संदेश दिया कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्यों एवं नैतिक मूल्यों से समझौता करना भी भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। उन्होंने आमजन से ईमानदारी, पारदर्शिता एवं नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।
नुक्कड़ नाटक में कल्पना, सूरजी, आंचल राणा एवं रंजना नेगी ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। आयुषी एवं अनिशा ने भी अपने अभिनय से प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया। वहीं पायल बिष्ट ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आमजन की भूमिका में अंशिका बिष्ट, कल्पना असवाल, रीता, साक्षी, प्राची एवं काजल ने प्रतिभाग किया। सभी छात्राओं ने उत्साहपूर्वक अपनी भूमिकाओं का निर्वहन करते हुए भ्रष्टाचार के विरुद्ध जागरूकता का संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन डॉ. संगीता बिजल्वाण जोशी द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकों में डॉ. मीना, डॉ. सीमा, डॉ. सनोवर, डॉ. मीनाक्षी एवं डॉ. अजीत उपस्थित रहे। साथ ही शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में हितेश, आशीष, योगा इंस्ट्रक्टर रघुवीर जी ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
सम्पूर्ण कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार सिंह के दिशा-निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन में नैतिक जिम्मेदारी, ईमानदारी, पारदर्शिता तथा भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता की भावना विकसित करना था।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह सार्थक संदेश दिया कि भ्रष्टाचार मुक्त समाज का निर्माण केवल कानूनों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सत्यनिष्ठा, नैतिकता और सामूहिक जिम्मेदारी से ही संभव है।
