दीपावली के नजदीक आते ही उल्लुओं की सुरक्षा एक चिंता का विषय ,उत्‍तराखंड में बढ़ाई सुरक्षा

उत्तराखण्ड

दीपावली के नजदीक आते ही उल्लुओं की सुरक्षा एक चिंता का विषय ,उत्‍तराखंड में बढ़ाई सुरक्षा

दीपावली को लेकर पछुवादून के जंगलों में उल्लुओं और आसन वेटलैंड में प्रवासियों परिंदों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग अलर्ट मोड पर है। अंधविश्वास के चक्कर में कुछ लोग दीपावली की रात तांत्रिक क्रियाओं के लिए उल्लुओं की बलि देते हैं। दीपावली का पर्व करीब आते ही जंगल में उल्लुओं की जान पर खतरा बना रहता है। कार्बेट टाइगर रिजर्व, रामनगर वन प्रभाग व तराई पश्चिमी वन प्रभाग के जंगलों में उल्लुओं की सुरक्षा को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है। कार्बेट व वन विभागों में रेंज के स्टाफ को गश्त तेज करने व उल्लुओं की मौजूदगी वाली जगह में निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

दरअसल दीपावली पर कुछ लोग अंधविश्वास के चलते उल्लू की बलि देकर कई तरह के अनुष्ठान कर अपने हित साधने का प्रयास करते हैं। इसके अलावा कई लोग उल्लू को पकड़कर दीपावली के दिन मां लक्ष्मी के साथ उसकी पूजा भी करते हैं। भारत में हिंदू मान्यता के अनुसार यह धन की देवी लक्ष्मी का वाहन है। त्योहार पर इसकी मांग होने की वजह से उल्लू की तस्करी का खतरा बढ़ जाता है। यह हाल तब है जब उल्लुओं के शिकार पर कानूनी पाबंदी है।

कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डा. साकेत बडोला ने बताया कि जिन क्षेत्रों में उल्लूओं के वास स्थल हैं, वहां निगरानी के निर्देश दिए हैं। अभी तक इनके शिकार या तस्करी की घटना सामने नहीं आई है। दीपावली के समय इनकी तस्करी का खतरा रहता है।

उल्लू भारतीय वन्य जीव अधिनियम 1972 की अनुसूची एक के तहत संरक्षित प्रजाति का पक्षी घोषित है। इसके शिकार में पकड़े जाने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है। इनको पालना व शिकार करना प्रतिबंधित है। वन्य जीवों के अंगों के व्यापार को रोकने काले ट्रैफिक संगठन के मुताबिक दुनिया में मिलने वाली 250 प्रजाति में से 36 भारत में मिलती है।
रामनगर के पक्षी विशेषज्ञ दीप रजवार व संजय छिम्वाल बताते हैं कि 16 प्रजाति कार्बेट टाइगर रिजर्व व उसके आसपास के जंगल में पाई जाती है। पूरे उत्तराखंड की बात करें तो उल्लू की 19 प्रजातियां चिह्नित की गई हैं।

उल्लुओं की सुरक्षा के लिए लच्छीवाला रेंज में हूंट फॉर हेल्प अभियान चलाया गया है। वन क्षेत्राधिकारी मेधावी कीर्ति ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य अंधविश्वास के कारण उल्लुओं के अवैध शिकार और व्यापार को रोकना है। साथ ही अभियान के जरिये लोगों को उल्लुओं के पारिस्थितिक महत्व के बारे में जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि उल्लू हमारे पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे कृंतकों जैसे कीटों की आबादी को नियंत्रित करते हैं। कोई भी व्यक्ति किसी घायल उल्लू को देखें तो उसे नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत विभाग को इसकी जानकारी दें। इस मौके पर शैलेंद्र रावत, रजत कुमार, अंकित सिंह, विजय थपलियाल, सीमा मिश्रा, नूतन, अभिषेक आदि मौजूद रहे।

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