उत्तराखण्ड
मकर संक्रांति की तिथि को लेकर भ्रम 14 या 15 जनवरी, कब है मकर संक्रांति?
इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को मुख्य रूप से धार्मिक और शुभ दिन के रूप में मनाई जा रही है, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशी में प्रवेश करता है और उसके साथ ही उत्तरायण की शुरुआत होती है — इसे छह महीने के लिए सूर्य का उत्तर की ओर बढ़ना माना जाता है, जो बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन को लेकर कुछ परंपराओं में यह भी विश्वास किया जाता है कि 15 जनवरी को भी पुण्य स्नान और दान-पुण्य का समय मान्य होता है, इसलिए श्रद्धालु इस दिन भी पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य प्राप्त करेंगे।
मकर संक्रांति की तिथि को लेकर भ्रम क्यों?
पंचांग के अनुसार 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ही मकर संक्रांति कहलाता है। चूंकि यह गोचर दोपहर बाद हो रहा है, इसलिए तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि गोचर के आधार पर मकर संक्रांति 14 जनवरी को मानी जा सकती है, जबकि स्नान-दान, पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए 15 जनवरी को अधिक शुभ माना जा रहा है। इसी वजह से दोनों तारीखों का अपना-अपना महत्व है।
मकर संक्रांति का हर राज्य में अलग-अलग नाम
मकर संक्रांति का हर राज्य में अलग-अलग नाम हैं। जैसे महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, असम में बिहू और दक्षिण भारत में ओणम आदि। उत्तर भारत के गांगेय प्रदेशों में स्नान पर्व प्रारंभ होते हैं। पर्वतीय राज्यों में उत्तरायणी शुरू हो जाती है। पंजाब का पर्व लोहड़ी भी गुड़ तिल मूंगफली और अग्नि पूजा से जुड़ा है। गुरुकुलों में इसी दिन विद्यासत्र प्रारंभ होते थे। संक्रांति के अवसर पर उड़द की दाल और चावल वाली खिचड़ी घरों में खाई जाती है और दान की जाती है।
