एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय के एस.आर.टी. परिसर में दो दिवसीय वानस्पतिक कार्यक्रम संपन्न
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) के स्वामी राम तीर्थ परिसर के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा दो दिवसीय शैक्षणिक कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एल.आर. डंगवाल के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को पर्यावरणीय स्थिरता और हिमालयी कृषि-वानिकी के विविध पहलुओं से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के प्रथम चरण में पोस्टर प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका शीर्षक ‘ पृथ्वी का संरक्षण ‘ था। इसमें छात्र-छात्राओं द्वारा रचनात्मक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण का पूर्ण मनोयोग के साथ प्रदर्शन किया गया। इस प्रतियोगिता में वाह्य निर्णायक की भूमिका डॉ• आशा डोभाल, वनस्पति विज्ञान विभाग, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नई टिहरी, डॉ• रविंद्र सिंह एवं डॉ• आशीष डोगरा, जंतु विज्ञान विभाग, स्वामी राम तीर्थ परिसर, बादशाहिथौल, द्वारा की गई। प्रतियोगिता में श्रेया सेमवाल ने प्रथम, अनुष्का भद्री ने द्वितीय एवं फिजा परवीन ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। द्वितीय दिवस को ‘हिमालय में सतत विकास हेतु कृषि-वानिकी’ विषय पर एक व्याख्यान आयोजन किया गया जिसके मुख्य वक्ता डॉ. भूपेंद्र सिंह बुटोला, सहायक प्रोफेसर, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, रानीचौरी रहे। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन परिसर निदेशक प्रोफेसर ए.ए. बौड़ाई द्वारा किया गया। इस अवसर पर आयोजित व्याख्यान सत्र में प्रो. जे.डी.एस. नेगी, प्रो. डी.के. शर्मा और विशिष्ट पैनल के सदस्य उपस्थित रहे। डॉ. बुटोला ने अपने संबोधन में बताया कि किस प्रकार कृषि-वानिकी सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है। उन्होंने उत्तराखंड में कृषि-वानिकी के उपयोग, उनके समक्ष आने वाली चुनौतियों, उनके समाधान और इस क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध कार्यों पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की। इस अवसर पर वनस्पति विज्ञान विभाग के 150 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ• एलआर डंगवाल द्वारा सभी आगंतुकों का धन्यवाद किया गया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम के सफ़ल आयोजन में डॉ• शिवानी उनियाल, डॉ• पिया रायचौधरी, डॉ• प्रमोद उनियाल, डॉ• प्रियंका उनियाल, डॉ• प्रीति नैथानी, डॉ• मीनाक्षी रावत, श्री उत्तम तोमर, श्री रमेश पंवार एवं सभी छात्र – छात्राओं का विशेष सहयोग रहा।