रुद्रप्रयाग
रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि क्षेत्र में 8 दिन से लापता 4 साल के मासूम मयंक का शव घर से डेढ़ किलोमीटर दूर मिला,मौत बनी पहेली
रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि क्षेत्र में 8 दिन से लापता 4 साल के मासूम मयंक का शव घर से महज डेढ़ किलोमीटर दूर जंगल में मिला है। चौंकाने वाली बात यह है कि शरीर पर न चोट के निशान हैं और न ही जंगली जानवर के हमले के संकेत- जिससे मौत अब रहस्यमयी हो गई है।
जानकारी के अनुसार बाड़व निवासी मनीषा देवी और विजय लाल का पांच वर्षीय पुत्र मयंक अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के साथ-साथ एसडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमों ने व्यापक स्तर पर खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया। कई दिनों तक लगातार जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में तलाश की गई, लेकिन मासूम का कोई सुराग नहीं मिल पाया।
लगातार 8 दिनों की खोजबीन के बाद रविवार सुबह मासूम का शव गांव से लगभग 5 किमी दूर जंगल में मिलने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल मौत के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है और पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
वन विभाग के रेंजर हरी शंकर रावत के अनुसार, मौके पर किसी जंगली जानवर के हमले के कोई स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं, जिससे यह मामला और भी संदिग्ध हो गया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। स्थानीय लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं और प्रशासन से मामले की गहन जांच की मांग कर रहे हैं। मयंक की तलाश के लिए पिछले 8 दिनों से ग्रामीण, वन विभाग, डीडीआरएफ और पुलिस लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। ड्रोन और सीसीटीवी फुटेज के जरिए भी आसपास के इलाकों की छानबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला था।
जांच पर उठ रहे सवाल
कोतवाली प्रभारी गुमान सिंह नेगी के अनुसार, जिस जगह से 150 मीटर पहले तक सर्च किया गया था, उसी के आगे बच्चे का शव मिला। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब कई किलोमीटर तक तलाश हुई, तो यह इलाका कैसे छूट गया।
पुलिस ने शव को जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी।
