देहरादून
उत्तराखंड के पूर्व CM बीसी खंडूरी का निधन,लंबे समय से चल रहे थे बीमार
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को निधन हो गया। वह 91 साल के थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता खंडूरी का देहरादून के मैक्स अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनकी बेटी ऋतु खंडूरी ने निधन की पुष्टि की है। खंडूरी के निधन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत अनेक बड़े नेताओं ने दुख जताया है।
उत्तराखंड के चौथे मुख्यमंत्री रहे भुवन चंद्र खंडूड़ी को अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति में लाए थे। ये 1990 का दौर था। खंडूड़ी सेना से रिटायर हुए थे। भुवन चंद्र खंडूड़ी की गिनती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भरोसेमंदों में होती थी। पहली बार लोकसभा पहुंचने के दो साल के भीतर ही खंडूड़ी को पार्टी का मुख्य सचेतक बना दिया गया।
1996 के लोकसभा चुनाव में खंडूड़ी को हार का सामना करना पड़ा। 1999 में अटल बिहारी सरकार में सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया। इस दौर में देश में सड़कों की शक्ल बदलने और हाईवे बनाने का काम हुआ जिसके लिए खंडूड़ी की आज तक प्रशंसा होती है। कहा जाता है कि वाजपेयी का खंडूड़ी पर इतना भरोसा था कि उन्हें काम करने की पूरी आजादी मिली हुई थी।
दो बार रहे सीएम
भारतीय सेना में लंबी सेवा के बाद भुवन चंद्र खंडूरी मेजर जनरल के पद से रिटायर हुए थे। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा था। वह पहली बार 2007 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। मार्च 2007 से जून 2009 तक वह इस पद पर रहे। 2009 लोकसभा चुनाव में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 2011 वह दोबारा मुख्यमंत्री बने। उन्होंने सितबर 2011 से मार्च 2012 तक इस पद पर कार्य किया। अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था।
खंडूरी जी का निधन उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति- मुख्यमंत्री धामी बोल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सार्वजनिक जीवन में भी उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। प्रदेशहित में लिए गए उनके कई महत्वपूर्ण निर्णयों ने विकास को नई दिशा दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडूरी जी की सादगी, स्पष्टवादिता और कार्यकुशलता सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी। उनका निधन केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है।
