टिहरी
दिल्ली के सेन्ट्रल पार्क में साकार हुआ राष्ट्रीय उत्तरायणी अभियान
हजारों लोगों की उपस्थिति में अध्यात्म,संस्कृति, पर्यावरण चेतना और राष्ट्रीय एकता का प्रभावी संदेश।
उत्तराखण्ड
पर्वतीय लोकविकास समिति द्वारा प्रकृति के सम्मान,पर्यावरण चेतना और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक पर्व के रूप में वर्ष 2005 से निरंतर संचालित राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव इस बार सुखी परिवार फाउंडेशन और दिल्ली सरकार के सहयोग से नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुआ।
सर्वप्रथम सुप्रसिद्ध जैन संत डॉ.गणी राजेन्द्र विजय जी के सान्निध्य में आचार्य मोहन भट्ट और आचार्य रमेश भट्ट ने सृष्टि रक्षा समरसता महायज्ञ पूर्ण किया।
जन परिसंवाद में विद्वान् विशेषज्ञ वक्ताओं ने तीन शताब्दी व्यक्तित्वों-राजनीति क्षेत्र के अजातशत्रु नेता भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी,पर्यावरण पुरोधा पद्मविभूषण सुंदरलाल बहुगुणा और पृथक उत्तराखंड राज्य के जनक हिमालय गौरव इंद्रमणि बडोनी के योगदान पर चर्चा की। वक्ताओं में श्री लाल बहादुर शास्त्री केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के डीन प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक प्रो.हरेन्द्र सिंह असवाल और राज्यसभा की निदेशक श्रीमती मीना कंडवाल ने अपने विचार रखे ।
सेंट्रल पार्क में असंख्य लोगों के मध्य जब माँ भगवती नंदा की डोली प्रकट हुई तो परम्परागत परिधान से सजी उत्तराखंड की मातृशक्ति के द्वारा लगाए जयकारों और गीतों से पूरा वातावरण आस्था युक्त और भक्तिमय बना दिया।
समारोह के मुख्य अतिथि दिल्ली सरकार के लोकनिर्माण विभाग मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर 22 वें राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव का उद्घाटन किया। श्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि “उत्तरायणी जैसे सांस्कृतिक पर्व हमारी सनातन परंपरा की आत्मा हैं। जब दिल्ली की धरती पर उत्तरायणी पर्व मनाया जा रहा है, तो यह संदेश जाता है कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। नई दिल्ली के ह्रदय सेंट्रल पार्क में संभवतः यह पहला बड़ा आयोजन है जो वास्तव में इस अभियान की अवधारणा के साथ समाज और देश को प्रेरणा देने का कार्य करेगा।“
उत्तरायणी को पर्यावरण चेतना,सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक पर्व बताते हुए श्री प्रवेश साहिब सिंह ने ऐसे आयोजनों को भविष्य में और अधिक भव्य रूप देने का संकल्प व्यक्त किया।
अतिविशिष्ट अतिथि नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की सांसद सुश्री बांसुरी स्वराज ने कहा कि उत्तरायणी केवल उत्तराखंडी समाज की नहीं अपितु उनके साथ समस्त देशवासियों का राष्ट्रीय पर्व बन गया है। जिस विचार और परिश्रम से इस अभियान के व्यापक स्वरूप को स्थापित किया गया है,वह सराहनीय है।
गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी श्री अनिल बलूनी ने कहा कि ये अब पहाड़ के लोग सक्षम और प्रभावी हो रहे हैं। हमें उत्तराखंड से हो रहे पलायन को रोकने के भी प्रयास करने चाहिए।
राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव की अध्यक्षता करते हुए सुखी परिवार फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष जैन मुनि डॉ.गणी राजेंद्र विजय महाराज ने कहा कि पर्वतीय लोकविकास समिति ने यदि देश में अलग-अलग नामों से प्रचलित एक पर्व को एक बड़े विज़न और मिशन के रूप में राष्ट्रीय उत्तरायणी को सर्वमान्य पर्व बनाने का कार्य किया है।
पर्वतीय लोकविकास समिति के परामर्शदाता CA राजेश्वर पैन्यूली ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और अध्यात्म के साथ उत्तरायणी ने सामाजिक और राजनीतिक रूप से एक पहचान दिलाने का कार्य किया है।
पर्वतीय लोकविकास समिति के अध्यक्ष और राष्ट्रीय उत्तरायणी अभियान के संयोजक प्रो.सूर्य प्रकाश सेमवाल ने कहा कि 2005 से आधा दर्जन लोगों के साथ शुरू किया गया उत्तरायणी पर्व अपनी व्यापक अवधारणा के साथ अब सामाजिक समरसता,पर्यावरण चेतना और व्यापक जनजागरण का पर्याय बन चुकी है।
समारोह में आए अतिथियों का स्वागत दिल्ली सरकार की गढ़वाली कुमाउंनी और जौनसारी भाषा अकादमी के सचिव श्री नागेंद्रनाथ सी.पति त्रिपाठी,आयोजन समिति के समन्वयक नेपाल सिंह, विजय सती और सचिव संजय तड़ियाल ने किया। आयोजन को सफल बनाने में मुरार कंडारी,विपिन थपलियाल,विश्व बडोला,मंजू बिष्ट और धर्मवीर सिंह की प्रमुख भूमिका रही।
सेंट्रल पार्क में पहाड़ के वाद्ययंत्रों–दोल,दमाऊँ,मशकबीन और रणसिंघा के स्वर ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और उत्साह से युक्त बना दिया। दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से आई महिला कीर्तन मंडलियों एवं सामाजिक समितियों से जुड़ी महिला टोलियों ने भी गीत संगीत की प्रस्तुतियां दीं।
दिल्ली सरकार के संस्कृति विभाग के कलाकारों ने राष्ट्रीय उत्तरायणी में देशभक्ति से युक्त और विभिन्न राज्यों के लोकनृत्य प्रस्तुत किये।
राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव में सबसे प्रभावी प्रस्तुति “चक्रव्यूह” नाटक रहा। इसमें महाभारत के युद्ध के तेरहवें दिन घटित वीर अभिमन्यु की चक्रव्यूह में प्रवेश,संघर्ष और वीरगति की घटनाओं को उत्सव ग्रुप के निर्देशक डॉ.राकेश भट्ट ने 30 से अधिक कलाकारों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया।
इस अवसर पर समाज एवं राष्ट्रनिर्माण हेतु विशिष्ट योगदान देने वाले प्रमुख पदाधिकारी व्यक्तित्वों को राष्ट्र गौरव,दिल्ली गौरव एवं हिमालय गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।
बीर सिंह राणा
(राष्ट्रीय महासचिव पर्वतीय लोक विकास समिति)
