उत्तराखण्ड
UGC ACT 2026, क्या है यूजीसी कानून?, जानें उच्च शिक्षण संस्थानों में इसकी भूमिका और जिम्मेदारी
देश में उच्च शिक्षा से जुड़े यूजीसी के नए नियमों (UGC Act 2026) का मुद्दा गरमाया हुआ है। यूजीसी के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। बुद्धवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है और कहा है तब तक 2012 वाले नियम ही लागू रहेंगे।
13 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक नया नियम “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” (समता के संवर्द्धन से संबंधित विनियम, 2026) लागू किया था। यह नियम भारत के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों पर लागू होता है और इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित और अन्य प्रकार के भेदभाव को रोकना है।
यूजीसी क्या है?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission – UGC) भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को विनियमित, विकसित और सुदृढ़ करने वाली एक प्रमुख वैधानिक संस्था है। भारत में राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था स्थापित करने का पहला प्रयास वर्ष 1944 के सार्जेंट रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसमें एक विश्वविद्यालय अनुदान समिति गठित करने की सिफारिश की गई थी। UGC की स्थापना 1956 में UGC अधिनियम, 1956 के अंतर्गत की गई थी। यह केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
UGC का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है, जिसमें एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त दस अन्य सदस्य होते हैं।
इसके प्रमुख कार्यों में विश्वविद्यालयों को अनुदान आवंटित करना, उच्च शिक्षा सुधारों पर सलाह देना और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता व मानकों को बढ़ावा देना शामिल हैं।
UGC का मुख्य उद्देश्य भारत में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता, समानता और मानकीकरण सुनिश्चित करना है। यह आयोग विश्वविद्यालयों को अनुदान (Grants) प्रदान करता है, जिससे शिक्षण, शोध, अवसंरचना और अकादमिक विकास को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही UGC यह तय करता है कि कौन-से संस्थान विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करने के योग्य हैं।
UGC की एक महत्वपूर्ण भूमिका शैक्षणिक मानकों को निर्धारित करने की है। यह पाठ्यक्रम ढाँचा, शिक्षक योग्यता, शोध मानक, परीक्षा प्रणाली और डिग्री मान्यता से संबंधित नियम बनाता है। इसके अंतर्गत NET (National Eligibility Test) जैसी परीक्षाएँ आयोजित की जाती हैं, जो उच्च शिक्षा में अध्यापन और शोध के लिए न्यूनतम योग्यता तय करती हैं।
हाल के वर्षों में UGC ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप कई सुधार लागू किए हैं, जैसे Academic Bank of Credits (ABC), Multiple Entry-Exit System, ऑनलाइन और ओपन लर्निंग को बढ़ावा, तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और समावेशन से जुड़े नियम। इन प्रयासों का उद्देश्य शिक्षा को अधिक लचीला, समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाना है।
इस प्रकार, UGC भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ है, जो न केवल संस्थानों को वित्तीय सहायता देता है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, सामाजिक न्याय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी सुनिश्चित करने का कार्य करता है। इसके प्रभावी कार्यान्वयन से भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनती है।
क्या है नया यूजीसी कानून?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। यह रेगुलेशन 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रभावी हो गया है। हालांकि, इसके लागू होते ही देश के विभिन्न हिस्सों में अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों और समूहों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। नए रेगुलेशन की सबसे अहम विशेषता यह है कि अब अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है।
नए कानून के तहत अब उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले ओबीसी छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ होने वाले जातिगत भेदभाव या उत्पीड़न की शिकायत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष दर्ज करा सकेंगे। अब तक जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों और प्रकोष्ठ मुख्य रूप से एससी-एसटी समुदाय तक सीमित थे। नए रेगुलेशन के बाद प्रत्येक संस्थान में एससी, एसटी और ओबीसी के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ स्थापित करना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही यूनिवर्सिटी स्तर पर एक समानता समिति गठित की जाएगी। इसमें ओबीसी, महिला, एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों को सदस्य के रूप में शामिल करना जरूरी होगा। यह समिति हर छह महीने में अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और उसे यूजीसी को भेजना अनिवार्य होगा।
