भौंकुछ -विक्रम बिष्ट-पन्द्रह लाख बनाम पच्चीस हजार

कुछ दिन पहले उत्तराखण्ड में एक स्टिंग ऑपरेशन हुआ। थोड़ी सुर-सुराहट के बाद फुस्स। मिस्टर अक्कल बहादुर ने स्वयंम् अपनी पीठ थपथपाकर खुद को बेरोजगारी का भार झेल रहे उत्तराखंड का चौकीदार होने की हुंकार भरते हुए अपने को बेरोजगारों का चौकीदार घोषित कर दिया।
कुछ साल पहले ऐसी घोषणा राष्ट्रीय स्तर पर हुई थी। उससे पहले एक स्टिंग ऑपरेशन हुआ था। फर्क सिर्फ इतना था कि उस के दृष्टा सदाबहार महाज्ञानी बाबा एक आंख मारे थे, सो नाटक का कैनवास भी बड़ा था।
तब चार लाख करोड़ रुपयों का था, आज पच्चीस हजार का। तब खातों में 15-15 लाख रुपए आने वाले थे। इस बार अपने हिसाब से नौकरियां। तब निशाने पर कांग्रेस थी आज देवभूमि में तब की निशानेबाज पार्टी की सरकार।
वाकई ? असली निशाना तो मतदाता है, चुनाव तक माई बाप , उसके बाद मैं सबका बाप !

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