टिहरी मेडिकल कॉलेज के नाम पर जनता को गुमराह करना बंद करें ” — राकेश राणा

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“टिहरी मेडिकल कॉलेज के नाम पर जनता को गुमराह करना बंद करें ” — राकेश राणा

जिला कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश राणा ने स्थानीय विधायक किशोर उपाध्याय की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि टिहरी मेडिकल कॉलेज का मुद्दा भाजपा सरकार और स्थानीय विधायक के लिए विकास का नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति का माध्यम बन गया है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही मेडिकल कॉलेज की चर्चा फिर शुरू हो गई है, जबकि वर्षों से जनता को केवल आश्वासन ही मिले हैं।

राकेश राणा ने कहा कि विधायक का यह कहना कि मुख्यमंत्री अगली कैबिनेट में मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव लाएंगे, तब तक केवल एक राजनीतिक घोषणा है, जब तक सरकार कैबिनेट की स्वीकृति, बजट, भूमि, निर्माण एजेंसी और समय-सीमा की आधिकारिक घोषणा नहीं करती।

उन्होंने कहा कि लगभग 15 वर्षों तक विधायक 26 वर्षों से इस प्रदेश की राजनीति में रहने के बावजूद यदि टिहरी मेडिकल कॉलेज की फाइल आज भी घोषणाओं के भरोसे चल रही है, तो यह स्थानीय नेतृत्व की राजनीतिक विफलता का प्रमाण है। जनता जानना चाहती है कि इतने वर्षों में विधायक ने इस परियोजना के लिए कौन-कौन से ठोस और दस्तावेजी प्रयास किए और उनका परिणाम क्या निकला।

राकेश राणा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज जैसे गंभीर विषय मुख्यमंत्री के साथ खिल खिलाती हुई फोटो जारी कर ओर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वाहवाही लूटने से अस्पताल नहीं बनते। इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक तत्परता और जवाबदेही चाहिए।

उन्होंने टिहरी मेडिकल कॉलेज संघर्ष समिति से आह्वान किया कि वह शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिले और पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाए।

उन्होंने कहा, “हम किसी से कृपा नहीं मांग रहे, बल्कि टिहरी की जनता का अधिकार मांग रहे हैं। यदि सरकार और स्थानीय विधायक जनता की भावनाओं का सम्मान नहीं करेंगे, तो टिहरी की जनता सड़क से लेकर सदन तक लोकतांत्रिक आंदोलन छेड़ने को मजबूर होगी।”

राकेश राणा ने कहा कि अब जनता भाषणों और प्रेस कॉन्फ्रेंस से प्रभावित होने वाली नहीं है। जनता पूछ रही है— मेडिकल कॉलेज कब बनेगा? बजट कब मिलेगा? निर्माण कब शुरू होगा? इन सवालों का जवाब देना स्थानीय विधायक और राज्य सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, “टिहरी की जनता अब चुनावी जुमले नहीं, मेडिकल कॉलेज की नींव देखना चाहती है। यदि सरकार गंभीर है तो तुरंत कैबिनेट से स्वीकृति दिलाए, बजट जारी करे और निर्माण कार्य शुरू करे। अन्यथा जनता आने वाले समय में अपना राजनीतिक फैसला स्वयं करेगी।”