बागेश्वर
बागेश्वर: SIR के काम के दबाव से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने लगाई फांसी, पति ने लगाए गंभीर आरोप
कांडा थाना क्षेत्र के बांसतोली गांव में रविवार सुबह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं बूथ लेवल ऑफिसर बीएलओ कमला देवी 47 का शव घर के पास एक पेड़ से लटका मिला। कमला देवी बूथ संख्या-164 जूनियर हाईस्कूल गणेशपुर की बीएलओ थीं।
क्या है मामला
परिजनों के अनुसार रविवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे कमला देवी के पति पूरन राम गाय का दूध दुहने गए थे। लौटकर देखा तो कमला घर में नहीं थीं। तलाश करने पर उनका शव खेत में पेड़ से लटका मिला। सूचना पर थानाध्यक्ष बलवंत कंबोज पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
पति का आरोप: SIR के दबाव से उठाया कदम
पूरन राम ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण SIR के काम के दबाव के कारण कमला ने ऐसा कदम उठाया। उन्होंने बताया कि 31 जुलाई तक 88 नोटिस वितरित करने थे, लेकिन कमला 56 नोटिस ही दे पाई थीं। बचे 32 नोटिस को लेकर वह पिछले दो दिनों से तनाव में थीं। 5 और 6 अगस्त को इंटर कॉलेज विजयपुर में प्रस्तावित SIR शिविर के लिए सभी बीएलओ को अद्यतन अभिलेखों के साथ उपस्थित होना था। पति का कहना है कि नोटिस वितरण के दौरान लोगों की नाराजगी और अधिकारियों के लगातार फोन आने से मानसिक दबाव बढ़ गया था।
अधिकारियों का पक्ष
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी कपकोट अनिल चिन्याल ने कहा कि कमला देवी ने सभी 88 नोटिस वितरण का कार्य पूरा कर लिया था। उन्होंने कभी काम के दबाव या तनाव की शिकायत नहीं की और अपना काम कुशलता से किया।
परिवार पर आर्थिक संकट
कमला देवी मूल रूप से पिथौरागढ़ के कालसीला बेरीनाग की रहने वाली थीं। मार्च 2003 में विवाह के बाद नवंबर 2003 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर नियुक्ति हुई थी। पति पूरन राम 1991 में आईटीआई कांडा में अस्थायी हिंदी आशुलिपिक थे। 2010 से 2023 तक बिना मानदेय सेवा देने के बाद 2023 में स्थायी नियुक्ति होने पर उन्होंने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह कमला पर आ गई थी।
कमला के दो बच्चे उच्च शिक्षा कर रहे हैं। बेटी एमएससी कर रही है और बेटा लोकेश पढ़ाई कर रहा है। परिजनों का कहना है कि अब बच्चों की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल होगा।
जिले में 405 आंगनबाड़ी संभाल रही हैं बीएलओ का काम
जिला प्रशासन के अनुसार बागेश्वर में 2003 के SIR के बाद मतदाता सूची में कई विसंगतियां सामने आई हैं। इन्हें दूर करने के लिए जिले में 405 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बीएलओ की जिम्मेदारी निभा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पहले काम मैन्युअल होता था, अब सिस्टम आधारित है। छोटी-छोटी कमी पर पोर्टल उसे ओके नहीं करता, जिससे बीएलओ पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
घटना के बाद विभिन्न संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
