उत्तराखंड की ‘दिस ट्री वोंट फॉल’ पहुंची लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल, सुदेशा देवी के चिपको संघर्ष को मिलेगी वैश्विक पहचान

देहरादून

उत्तराखंड की ‘दिस ट्री वोंट फॉल’ पहुंची लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल, सुदेशा देवी के चिपको संघर्ष को मिलेगी वैश्विक पहचान

उत्तराखंड की पर्यावरणीय विरासत और महिला शक्ति की मिसाल बनी डॉक्यूमेंट्री ‘दिस ट्री वोंट फॉल’ ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। फिल्म का चयन प्रतिष्ठित लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल 2026 के लिए हुआ है।

फिल्म के मुख्य बिंदु:
केंद्र में सुदेशा देवी: 83 वर्षीय पर्यावरण संरक्षक सुदेशा देवी के जीवन और चिपको आंदोलन में उनकी भूमिका को फिल्म में दिखाया गया है।

चार साल की मेहनत: करीब 50 साल पुराने चिपको आंदोलन पर चार साल के शोध के बाद यह डॉक्यूमेंट्री तैयार हुई है।
– महिलाओं का नेतृत्व*: फिल्म हिमालयी गांवों की उन महिलाओं की कहानी है जिन्होंने जंगलों को बचाने के लिए पेड़ों से चिपककर इतिहास रचा।

फिल्म के राइटर दीपक रमोला
फिल्म के लेखक दीपक रमोला ने कहा कि चिपको आंदोलन दुनिया के सबसे प्रभावशाली पर्यावरण आंदोलनों में से एक है। यह उन महिलाओं की बदौलत संभव हुआ जिनका जीवन जंगलों से सीधे जुड़ा था। ‘दिस ट्री वोंट फॉल’ ऐसी ही महिलाओं की पर्यावरणीय समझ और नेतृत्व को दुनिया के सामने लाती है।

टीम:
कहानी: दीपक रमोला, अपूर्वा बख्शी
निर्माण: अपूर्वा बख्शी, दीपक रमोला, मनीषा त्यागराजन
सिनेमैटोग्राफी: ध्रुव वर्मा, सिद्धार्थ गोविंदन
संपादन: अजीत नायर, ध्रुव वर्मा
संगीत: ताजदार जुनैद

फेस्टिवल की जानकारी:
लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल का आयोजन लंदन, बर्मिंघम और मैनचेस्टर में 19 जुलाई तक किया जा रहा है। इस मंच पर फिल्म का चयन उत्तराखंड के संघर्ष और चिपको आंदोलन को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का अहम मौका है।

यह डॉक्यूमेंट्री न सिर्फ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने रखेगी, बल्कि नई पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित भी करेगी।